प्रभाग

Division

वनस्पतियां और प्रवाल भि​त्तियां

Printer-friendly version

वनस्पतियां और प्रवाल भि​त्ति प्रभाग


भविष्य के लिए मैंग्रोव अर्थात कच्छ वनस्पतियां (एमएफएफ) एक अद्वितीय बहुद्देशीय, बहु—क्षेत्रवार, भागीदार - नेतृत्ववाली पहल है, जो तटीय प्रबंधन के उपायों के लम्बे इतिहास और सुनामी के बाद के पुनर्निर्माण और पुनर्वास के दौरान प्राप्त अनुभव के आधार पर बना है पहल भारतीय महासागर की तटीय समुदायों के अधिक स्वस्थ, समृद्ध और सुरक्षित भविष्य के दृष्टिकोण से, जहां सभी पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षित और स्थाई रूप से  प्रबंधित हैं, और यह पहल स्थायी तटीय विकास के लिए पारिस्थितिकी तंत्र में संरक्षण और कार्रवाई को बढ़वा देने का प्रयास है (एमएफएफ  विवरणिका) एमएफएफ  संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) द्वारा समन्वित किया जा रहा है, जिसमें  शुरू के छह सुनामी प्रभावित देश अर्थात् भारत, इंडोनेशिया, मालदीव, सेशेल्स, श्रीलंका और थाईलैंड हैं भारत आईयूसीएन - एमएफएफ  पहल में भाग लेने के लिए सहमत हो गया है

2. भविष्य के लिए मैंग्रोव के दो उद्देश्य हैं:

  •   तटीय विकास की पर्यावरणीय स्थिरता को मजबूत करना
  •   तटीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन में सतत विकास के लिए निधियों के निवेश और प्रयास को बढ़ावा देना

3. इस पहल में प्रत्यक्ष परिवर्तन और परिणाम प्रभाव के चार प्रमुख प्रभाव क्षेत्रों में लागू करने की बात कही गई है ज्ञानसृजन करना, संस्थानों और लोगों को उस ज्ञान को उपयोग करने के लिए सशक्त बनाना और उसके द्वारा अच्छे तटीय शासन को बढ़ावा देने की रणनीति को इस्तेमाल कर निजी क्षेत्रों को शामिल कर  सामुदयिक कार्रवाई करना ।

4. इस परियोजना के तहत  भारत की राष्ट्रीय समन्वय  निकाय (एनसीबी) 22 अक्टूबर 2007 को श्री बी एस पर्शीरा, विशेष सचिव, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार की अध्यक्षता में  स्थापित की गयी थी एनसीबी में 13 सदस्य (एनसीबी संयोजन) सरकार, अनुसंधान संगठन और निजी क्षेत्रों से हैं ।  तत्पश्चात, परियोजना के दैनिक कार्यकलापों को कुशलता से करने के लिए एनसीबी का एक छोटा कार्यकारी समूह भी स्थापित किया गया देश के पहल की परियोजना बनाने और प्रगति की समीक्षा के लिए आज तक एनसीबी सदस्यों की दो और कोरग्रुप की  तीन बैठकें (बैठकों के मिनट) हुई हैं

5. एनसीबी में एमएफएफ भारत परियोजना के लिए चार फोकल राज्यों अर्थात् गुजरात, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और उड़ीसा को अंतिम रूप से चुना गया है। देश में फैली तटीय क्षेत्र पारिस्थितिकी प्रणालियों के संरंक्षण एवं प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय रणनीति एवं कार्ययोजना (एनएसएपी) एमएफएफ, इंडिया परियोजना के तहत तैयार की गई है यह मसौदा दो राष्ट्रीय सलाहकार, प्रो. कथिरेसन, तटीय क्षेत्र प्रबंधन विशेषज्ञ और श्री सुखदेव ठाकुर, एक प्रसिद्ध वनपाल द्वारा तैयार किया गया था  ।  भारत एनएसएपी में तटीय एवं समुद्री जैव विविधता के संरक्षण और प्रबंधन के तीन मुख्य पहलुओं को बढ़ावा देने की परिकल्पना की गई है :

(1) तटीय बहाली,

(2) तटीय आजीविका, और

(3) एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन

 

ड्राफ्ट की समीक्षा और मंजूरी एनसीबी की दूसरी बैठक में दी गयी थी और अब व्यापक संचलन के लिए इसके प्रकाशन पर विचार किया जा रहा है

 

6. लघु अनुदान सुविधा से भारत परियोजना के निष्पादन में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।  सरकारी, गैरसरकारी और निजी क्षेत्रों के प्रतिभागियों को एक आम लक्ष्य के प्रति एकसूत्र में बांधने के लिए हमने देश भर में फैली 6 लघु परियोजनाओं के तहत पहले से आवंटित 100,000 अमरीकी डालर प्राप्त कर लिए हैं।  

 

वर्तमान में निम्न छह लघु अनुदान परियोजनाएं  कार्यान्वित की जा रही है:

क्रम संख्या

शीर्षक

पी आई  और संस्थान का नाम

स्वीकृत बजट (अमेरिकी डॉलर)

1.

सतत तटीय आजीविका; एकीकृत मेंग्रोव – मत्स्य कृषि तंत्र.

डॉ. वी. सेल्वम, एमएसएसआरएफ, चेन्नई, तमिलनाडु

25,000

.

चयनित मेंग्रोव स्थानों में फूलों की विविधता और मेंग्रोव प्रजातियों के प्राकृतिक नियोजनों का अध्ययन

श्री सी.एन.पांडे, जीईईआर, गुजरात

15,000

3.

भारत में प्रवाल नीतिओ (कोरल रीफ) की वर्तमान स्थिति, खतरे और संरक्षण के उपाय – राष्ट्रिय चिंतन बुद्धिशीलता कार्यशाला और  के प्रवाल अंतरराष्ट्रीय वर्ष 2008 के साथ प्रकाशन की निर्विष्टियों का प्रसार  

डॉ. जे एडवर्ड पैटरसन, एसडीएमआरआई, तूतीकरन, तमिलनाडु

12,000

4.

दक्षिणी भारत तटीय रेखा में आश्रय बेल्ट की स्थिति

गायत्री रामचंद्रन, इपीटीआरआई, आंध्र प्रदेश

24,500

5.

मेंग्रोव संरक्षण और मीठापुर का उत्थान

ग्रामीण विकास के लिए टाटा केमिकल्स सोसायटी, जामनगर, गुजरात

8,000

6.

सुंदरवन, मेंग्रोव और उसके पारिस्थितिकी तंत्र की निर्भरता को कम करने के लिए लागू वैकल्पिक आजीविका कार्यक्रम का महत्वपूर्ण गंभीर मूल्यांकन

मुख्य वन संरक्षक, पश्चिम बंगाल

15,000

 

छोटी परियोजना सुविधा का उद्देश्य छोटे अध्ययन करना है, जो जानकारी और देश के विभिन्न भागों में चल रहे कार्यों के अंतराल के मध्य सेतु बनने का काम करने के लिए है। छोटे अनुदान परियोजना के विकास एवं चयन के लिए एमएफएफ के तहत, विशिष्ट दिशानिर्देश बनाये गए हैं (लघु परियोजनाओं के लिए दिशानिर्देश), और भारत द्वारा ये दिशानिर्देश लघु अनुदान सुविधा के सभी परियोजनाओं के लिए अपनाये गए हैं । भारत ने पहली लघु अनुदान परियोजना पूरा कर सभी एमएफएफ देशों में बढ़त ले ली है । सुगंडी देवदासन समुद्री अनुसंधान संस्थान द्वारा भारत में प्रवाल भित्तियों की वर्तमान स्थिति, खतरों और संरंक्षण उपायों पर राष्ट्रीय विचार - विमर्श कार्यशाला (रीफ के अंतरराष्ट्रीय वर्ष 2008 के साथ) एमएफएफ देशो में सफलतापूर्वक पूरी की गई पहली परियोजना थी । प्रयोगशाला एसबीएमआरआई द्वारा 29-30 दिसंबर 2008 तूतीकरन में आयोजित की गई थी और संयोग से इसने भविष्य की कार्यवाही की मजबूत नींव डालते हुए रीफ के अंतरराष्ट्रीय वर्ष की समाप्ति को अंकित किया । जनवरी 2009 में आयोजित चौथी क्षेत्रीय संचालन समिति की बैठक में, भारत को 50,000 अमरीकी डालर की अतिरिक्त धनराशी मंजूर की गई और भारत ने पहले से ही इस धनराशी का लाभ उठाने के लिए चार परियोजनाओं के प्रस्ताव अलग कर लिये गये हैं। ये परियोजनाएं निम्नलिखित सूचीबद्ध हैं:—

 

क्रम संख्या

परियोजना शीर्षक

परियोजना प्रस्तावक

बजट अनुरोधित

(अमेरिकी डॉलर)

1.

भारत में तटीय पारिस्थितिकी पर्यटन की संभावनाएं– आवासों के संरक्षण और आजीविका उत्पन्न करने की रणनीति

डॉ. एम. वफर, एनआईओ, गोवा

13,000

2.

मेंग्रोव प्रभुत्व वाले भारतीय  सुन्दर वन में सतत मीठे पानी की जलकृषि

डा. अभिजीत मित्रा, कोलकाता

12,000

3.

भारत के मध्य पश्चिम घाट (सीडब्लूसीआई) के मेंग्रोव के स्थानों  द्वारा  प्रभावित क्षेत्रों के खाद्य की खाद्यता और अखाद्यता के लिए सीमांकन  धातु एकाग्रता द्वारा  दृढ़ संकल्प से निश्चित करना और उसके लिए कार्रवाई करना। 

डॉ. टी.जी. जगताप, एनआईओ, गोवा

12,000

4.

मैंग्रोव बहाली और वनीकरण: मौजूदा तरीकों का भागीदारी मूल्यांकन

डॉ. वी. सेल्वम, एमएसएसआरएफ, चेन्नई, तमिलनाडु

16,000

 

7. बड़े अनुदान:

इसके अतिरिक एमएफएफ की बड़ी परियोजना वित्त पोषण सुविधा भी है, जिसमें 2  वर्ष की अवधि की व्यक्तिगत परियोजनाओं को 300,000 अमरीकी डालर का अनुदान दिया जाता है   छोटे अनुदान परियोजनाओं की तरह बड़ी परियोजना प्रस्तावों के लिए भी विशिष्ट दिशानिर्देश (बड़ी परियोजना दिशानिर्देश) बनाये गए हैं । भारत इस धनराशी का लाभ उठाने की प्रक्रिया में है और इसने बड़ी परियोजना आमंत्रित कर 15 प्राप्त प्रस्तावों में 4परियोजना ओं को छांट लिया है ।  ये 4 परियोजना एनसीबी द्वारा समर्थित है और इन्हें आगे की मंजूरी प्रक्रिया के लिए एमएफएफ सचिवालय में भेज दिया गया है।

 

क्रम संख्या

परियोजना शीर्षक

प्रस्तुतकर्ता

बजट अनुरोधित (अमेरिकी डॉलर)

1.

सुंदरबन टाइगर रिजर्व, पश्चिम बंगाल में असुरक्षित मैंग्रोव संसाधन उपयोगकर्ताओं के लिए वैकल्पिक आजीविका का विकल्प

एन. सी. बहुगुणा, निदेशक, सुंदरबन जीवमंडल रिजर्व, पश्चिम बंगाल सरकार

300,000

2.

मन्नार की खाड़ी और दक्षिण भारत में तटीय संसाधन प्रबंधन और आजीविका, जागरूकता, और क्षमता में वृद्धि के लिए कोरल बहाली

सुगंथी देवदासन समुद्री अनुसंधान संस्थान (एसडीएमआरआई)

                                                                1, 49,875

3.

भारत में समुद्री कछुओं का संरक्षण

डॉ. सी.एन. पांडेय, निदेशक, गीर  फाउंडेशन

307,975

4.

खंभात की खाड़ी (गुजरात) के तट पर सामुदायिक सशक्तिकरण के साथ मेंग्रोव बहाली

पिसीसीऍफ़  एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन, गुजरात वन विभाग (जीओजी)

306,282

       
 

8. भारतीय कोरल रीफ्स निगरानी नेटवर्क (आईसीआरएमएन) ।

9. भविष्य के लिए मेंग्रोव (एमएफएफ) - आईयूसीएन भारत कार्यक्रम - अवधारणा नोट्स/ प्रस्तावों (लघु अनुदान परियोजनाओं) के लिए दिशानिर्देश ।

10. भविष्य के लिए मैंग्रोव (एमएफएफ)  - लघु अनुदान परियोजनाओं के संदर्भ में आईयूसीएन भारत अवधारणा नोट्स के लिए प्रोग्राम कॉल।

11. अवधारणा नोट के लिए समय सीमा का 27 जून,2011 तक किया गया  विस्तार  ।